सूरजपुर । जिले के बिश्रामपुर में सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। पिछले 36 घंटों से अधिक समय से बिश्रामपुर थाने के सामने कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन और अनशन लगातार जारी है। प्रशासन और कांग्रेस के आला नेताओं के बीच हुई मैराथन वार्ता के बाद एक बड़ी सफलता तो मिली है, लेकिन दो प्रमुख मांगों पर पेंच अब भी फंसा हुआ है। इस बीच, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सूबे के दिग्गज नेताओं ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

‘कार्यपालिका फेलियर’ बनाम ‘न्याय की पहली जीत’
इस पूरे घटनाक्रम पर सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने सीधे तौर पर शासन-प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए इसे “कार्यपालिका का फेलियर” करार दिया है। वहीं, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने इसे न्याय की आंशिक जीत बताते हुए कहा, “तीन बिंदुओं में से केवल एक बिंदु पर कार्रवाई हुई है, जो न्याय की जीत है। लेकिन हमारी बाकी दो मांगों पर जब तक कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।”
आंदोलन को और धार देने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेता खुद मैदान में उतर गए हैं:
- पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव खुद आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। लगातार अनशन पर बैठे सिंहदेव के स्वास्थ्य को देखते हुए मेडिकल टीम ने उनकी जांच भी की है।
- प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
- उनके साथ 5 अन्य प्रमुख कार्यकर्ता भी क्रमिक हड़ताल पर बैठकर मोर्चे को संभाले हुए हैं।
कांग्रेस को मिली पहली सफलता: दर्ज हुई एफआईआर
कांग्रेस के इस भारी दबाव के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा है। मामले में एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब कांग्रेस नेता नरेंद्र जैन की पत्नी के आवेदन पर पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली। दीपक बैज ने इसे कार्यकर्ताओं के संघर्ष की जीत बताया है।
हालांकि, देर रात तक प्रशासन और कांग्रेस के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। तीन सूत्रीय मांगों में से केवल एक (FIR दर्ज करने) पर सहमति बनी है, जबकि दो अन्य मांगों पर प्रशासन और कांग्रेस के बीच अब भी गतिरोध बना हुआ है।
36 घंटे से ‘थाना’ बना छावनी, पीछे हटने को तैयार नहीं कांग्रेसी
बिश्रामपुर थाने के बाहर का नजारा इस समय किसी सियासी अखाड़े से कम नहीं है। कड़कड़ाती धूप और रात की ओस के बीच, पिछले 36 घंटों से अधिक समय से कांग्रेसी कार्यकर्ता तंबू गाड़कर डटे हुए हैं। नेताओं का साफ कहना है कि जब तक उनकी तीनों मांगें पूरी नहीं की जातीं, वे बिश्रामपुर थाने के सामने से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।
अब देखना यह होगा कि टीएस सिंहदेव और दीपक बैज के इस कड़े रुख के बाद बैकफुट पर आया प्रशासन बाकी दो मांगों पर क्या रास्ता निकालता है।
Author: Khabri Chai
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