नई दिल्ली। सड़क हादसों में पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने और मोटर वाहन कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कई अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने नई निजी कारों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष और नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच वर्ष से बढ़ाकर छह वर्ष कर दी है। इस फैसले के बाद नई गाड़ी खरीदने वालों को बीमा के लिए अधिक राशि एकमुश्त चुकानी होगी। साथ ही बीमा नियामक इरडा को नई प्रीमियम दरें तत्काल तय करने के निर्देश दिए गए हैं।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि वर्ष 2018 में लंबी अवधि का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन अब भी बिना बीमा सड़कों पर चल रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हितों को देखते हुए बीमा अवधि बढ़ाना आवश्यक है।
बिना बीमा वाहन को ईंधन न देने पर विचार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और इरडा को ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का सुझाव दिया है, जिसके तहत वैध थर्ड पार्टी बीमा नहीं होने पर वाहनों को पेट्रोल या डीजल उपलब्ध न कराया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल सिफारिश है, अनिवार्य आदेश नहीं।
कैमरे पहचानेंगे बिना बीमा वाहन
अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्गों के चुनिंदा टोल प्लाजा पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। इन कैमरों को इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और वाहन पोर्टल से जोड़ा जाएगा, ताकि बिना बीमा वाले वाहनों की स्वत: पहचान हो सके और ई-चालान जारी किया जा सके।
पुलिस को मिलेगी रियल टाइम जांच की सुविधा
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को ऐसे मोबाइल एप और हैंडहेल्ड उपकरण उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है, जिनकी मदद से मौके पर ही किसी भी वाहन के बीमा की स्थिति की जांच की जा सके। साथ ही लोगों को भी ऑनलाइन माध्यम से वाहन का बीमा स्टेटस और पॉलिसी की जानकारी देखने की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
बीमा व्यवस्था को बनाया जाएगा व्यापक
अदालत ने इरडा को थर्ड पार्टी बीमा के साथ यात्री सुरक्षा, व्यक्तिगत दुर्घटना और वाहन क्षति जैसे कवर को शामिल करते हुए व्यापक बीमा ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
देश की 56 प्रतिशत गाड़ियां अब भी बिना बीमा
सुप्रीम कोर्ट ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में करीब 56 प्रतिशत वाहन अब भी बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। अदालत ने कहा कि यह स्थिति सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने में बड़ी बाधा बन रही है, इसलिए प्रभावी और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था समय की जरूरत है।
Author: Khabri Chai
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