Jhiram Ghati Naxal Attack: झीरम घाटी हमले पर फैसला टला, अब 5 सितंबर को आएगा NIA कोर्ट का निर्णय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 31 अगस्त को आने वाला फैसला टल गया है। स्पेशल NIA कोर्ट अब इस मामले में 5 सितंबर 2026 को अपना निर्णय सुनाएगी। लंबे समय से फैसले का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवारों और प्रदेशवासियों की नजर अब अदालत की अगली तारीख पर टिकी है।

Cg:झीरम नक्सली हमला; सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की एनआईए की याचिका, अब  छत्तीसगढ़ पुलिस करेगी मामले की जांच - Chhattisgarh News Supreme Court  Reject Petition Against Nia Over ...

मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि 10 आरोपियों के खिलाफ फैसला आना बाकी है। अभियोजन पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान और विभिन्न दस्तावेज अदालत में पेश किए गए हैं।

10 अगस्त को पूरी हुई थी अंतिम बहस

झीरम घाटी मामले में स्पेशल NIA कोर्ट ने 10 अगस्त को अंतिम बहस की तारीख तय की थी। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को साबित करने की दलील दी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती देते हुए अपना पक्ष रखा। अब अदालत इन सभी साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर निर्णय सुनाएगी।

101 गवाहों के बयान बने अहम आधार

मामले की लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान अदालत के सामने दर्ज कराए। इसके अलावा घटना से जुड़े विभिन्न दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए।

अब 5 सितंबर को आने वाला फैसला इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हालांकि, अदालत के निर्णय में क्या निष्कर्ष निकलता है, यह फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

क्या था झीरम घाटी नक्सली हमला?

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में झीरम घाटी के पास कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। उस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही थीं और कांग्रेस ने चुनावी अभियान के तहत परिवर्तन यात्रा निकाली थी।

सुकमा में कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला जगदलपुर की ओर लौट रहा था। काफिले में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

पेड़ गिराकर रोका गया था काफिला

झीरम घाटी में नक्सलियों ने सड़क पर पेड़ गिराकर काफिले का रास्ता रोक दिया। जैसे ही वाहन रुके, हथियारबंद नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया।

हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

महेंद्र कर्मा की भी हुई थी हत्या

झीरम घाटी हमले में कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने विशेष रूप से निशाना बनाया था। कर्मा को नक्सली लंबे समय से अपना प्रमुख विरोधी मानते थे। वे सलवा जुडूम आंदोलन से भी जुड़े रहे थे।

हमले के दौरान नक्सलियों ने काफिले में मौजूद लोगों की पहचान की और कई नेताओं को निशाना बनाया। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियान को लेकर भी देशभर में गंभीर चर्चा हुई।

13 साल बाद भी फैसले का इंतजार

झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित नक्सली हमलों में शामिल है। घटना के बाद से ही इसकी जांच, आरोपियों की पहचान और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल और चर्चाएं होती रही हैं।

अब अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। 5 सितंबर 2026 को आने वाले निर्णय पर पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

फिलहाल फैसला टलने के बाद सभी की नजरें 5 सितंबर पर हैं। अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि मामले में पेश किए गए गवाहों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आरोपियों के संबंध में क्या निष्कर्ष निकलता है।

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Author: Khabri Chai

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