छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर बड़ा बदलाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब प्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के जरिए कराए जाएंगे। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन किया है। संशोधित नियमों की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद ईवीएम से मतदान का प्रावधान औपचारिक रूप से नियमों में शामिल हो गया है।

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यह बदलाव राज्य निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव के आधार पर किया गया है। इसके साथ ही मतदान प्रक्रिया, रिकॉर्ड संधारण, मतगणना और चुनावी सामग्री से जुड़े कई प्रावधानों की भाषा में भी बदलाव किया गया है।

पहली बार नियमों में EVM का स्पष्ट प्रावधान

संशोधित नियमों में अब मतदान के लिए केवल मतपत्र का उल्लेख नहीं रहेगा, बल्कि ‘मतपत्र अथवा मतदान मशीन’ का प्रावधान किया गया है। इसी तरह पुराने नियमों में इस्तेमाल होने वाले ‘मतपेटियां’ जैसे शब्दों की जगह अब ‘मतदान हेतु निर्वाचन सामग्रियां’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस बदलाव से नगरीय निकाय चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर नियमों में स्पष्टता आएगी। चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसके रखरखाव से जुड़े प्रावधान भी नए स्वरूप में लागू होंगे।

मतदान के रिकॉर्ड में भी होगी नई व्यवस्था

ईवीएम से मतदान होने के साथ ही पीठासीन अधिकारियों द्वारा तैयार किए जाने वाले रिकॉर्ड में भी बदलाव किया गया है। मतदान के दौरान ईवीएम में दर्ज कुल मतदाताओं की संख्या और वास्तव में डाले गए मतों की संख्या का अलग-अलग रिकॉर्ड रखा जाएगा।

इसके अलावा NOTA यानी ‘उपर्युक्त में से कोई नहीं’ को मिले मतों की संख्या भी अलग से दर्ज की जाएगी। अंडर वोट और अधूरे दर्ज मतों से जुड़ी जानकारी को भी रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा।

इससे मतदान के दौरान अलग-अलग श्रेणी के मतों का स्पष्ट हिसाब उपलब्ध रहेगा और चुनाव प्रक्रिया के रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जा सकेगा।

वोट दर्ज नहीं करने पर भी दर्ज होगी स्थिति

संशोधित नियमों में उस स्थिति को भी स्पष्ट किया गया है, जब किसी मतदाता को मतदान की अनुमति मिल जाती है, लेकिन वह ईवीएम पर अपना वोट दर्ज नहीं करता।

ऐसी स्थिति को नियमों के अनुसार ‘मतदान से इन्कार’ के रूप में दर्ज किया जाएगा। यानी मतदान केंद्र पर पहचान और प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि मतदाता वोट दर्ज नहीं करता है, तो उसकी स्थिति का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा।

प्रत्याशियों के लिए तैयार होगा नया प्रारूप

नगरीय निकाय चुनाव में उम्मीदवारों से संबंधित जानकारी के लिए भी नया प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसमें प्रत्याशी की फोटो, पता और राजनीतिक दल से जुड़ी जानकारी शामिल की जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की जानकारी को एक निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराना है, जिससे मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों को प्रत्याशियों की पहचान और राजनीतिक संबद्धता से जुड़ी जानकारी आसानी से मिल सके।

चुनाव अधिकारियों को भेजी गई संशोधित नियमों की जानकारी

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने संशोधित नियमों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को भेज दी है। इसमें राज्य निर्वाचन आयोग के साथ संभागीय अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

अब आगामी नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों में ईवीएम आधारित मतदान व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

मतदान से लेकर मतगणना तक बदलेगी प्रक्रिया

नियमों में संशोधन के बाद नगरीय निकाय चुनाव में मतदान से लेकर रिकॉर्ड तैयार करने और मतगणना तक की प्रक्रिया में ईवीएम को स्पष्ट स्थान मिल गया है। चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों को भी नए नियमों के अनुरूप रिकॉर्ड संधारण और मतदान प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

कुल मिलाकर, EVM के इस्तेमाल को नियमों में शामिल करना और प्रत्याशियों की जानकारी के लिए नया प्रारूप तैयार करना आगामी नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे चुनाव संचालन से जुड़े प्रावधान पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

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Author: Khabri Chai

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