रायपुर। जल संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली दौरे से लौटने के बाद प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर किए जा रहे कार्यों और राष्ट्रीय स्तर पर मिली उपलब्धियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में आयोजित जल सुरक्षा शिखर सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के ‘कैच द रेन’ और ‘जल संचय जनभागीदारी’ मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया।
![]()
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को देश के सामने रखने का अवसर मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने इसे प्रदेशवासियों की सामूहिक सहभागिता और जल संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिणाम बताया।
जल सुरक्षा शिखर सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मॉडल की चर्चा
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि उनके तीन दिवसीय दिल्ली प्रवास के दौरान वे जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित जल सुरक्षा शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, जल संचय और जनभागीदारी के माध्यम से किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की गई।
प्रदेश में बारिश के पानी को सहेजने, भूजल स्तर बढ़ाने तथा पारंपरिक और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अलग-अलग स्तरों पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों को इससे जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
‘कैच द रेन’ अभियान में छत्तीसगढ़ का शानदार प्रदर्शन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि ‘कैच द रेन’ और ‘जल संचय जनभागीदारी’ अभियान में छत्तीसगढ़ ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।
अभियान के पहले और दूसरे चरण में प्रदेश ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया था। वहीं अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेशवासियों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में मिली यह पहचान बताती है कि जनभागीदारी के माध्यम से बड़े स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
भाजपा शासित राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों की कार्यशाला में भी शामिल हुए CM
दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री साय भाजपा शासित राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों की कार्यशाला में भी शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यशाला में जल संरक्षण, जल संचय और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को लेकर विभिन्न राज्यों के अनुभवों और प्रयासों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की जानकारी भी साझा की।
जनभागीदारी से जल स्रोतों को मिल रही नई जिंदगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। पानी की उपलब्धता और भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए समाज और आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जनसहयोग से जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के कार्य किए जा रहे हैं। बारिश के पानी को अधिक से अधिक संरक्षित करने, भूजल स्तर को बढ़ाने और पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
तालाब, कुएं और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के साथ वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में जल संरक्षण को सिर्फ सरकारी अभियान के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उनका कहना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने और जल स्रोतों को संरक्षित करने की जिम्मेदारी समझे तो भविष्य में जल संकट की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देशभर में जल सुरक्षा पर जोर
सीएम साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को लेकर विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ भी इन अभियानों को प्रभावी तरीके से लागू करते हुए जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा का संबंध केवल पानी की उपलब्धता से नहीं है, बल्कि यह कृषि, पर्यावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा विषय है।
‘सभी के सहयोग से नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा छत्तीसगढ़’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जल संरक्षण के क्षेत्र में मिली राष्ट्रीय उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में भी जल सुरक्षा, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए काम जारी रखेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे बारिश के पानी को सहेजें, पानी की बर्बादी रोकें और अपने आसपास मौजूद जल स्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका कहना है कि आज बचाया गया पानी ही आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी बन सकता है।
Author: Khabri Chai
Khabri Chai news portal.





