सरकारी गोदामों में चावल का भंडार बढ़ा, केंद्र घटाएगा 102 लाख टन धान की खरीद; छत्तीसगढ़ पर भी पड़ सकता है असर

नई दिल्ली/रायपुर। सरकारी गोदामों में चावल का स्टॉक जरूरत से अधिक होने के कारण केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए धान खरीद का अनुमान पिछले वर्ष की तुलना में कम कर दिया है। इस बार केंद्र करीब 708.64 लाख टन धान खरीदने की तैयारी में है, जबकि खरीफ सीजन 2025-26 में करीब 810.72 लाख टन धान खरीदा गया था।

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इस हिसाब से इस बार अनुमानित सरकारी खरीद में करीब 102 लाख टन की कमी आने वाली है। केंद्र के इस फैसले का असर उन राज्यों पर पड़ सकता है, जहां से केंद्रीय पूल के लिए बड़ी मात्रा में चावल उपलब्ध कराया जाता है। इनमें धान उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य छत्तीसगढ़ भी शामिल है।

हालांकि, छत्तीसगढ़ सरकार ने इस खरीफ सीजन में भी केंद्रीय पूल के लिए 89 लाख टन चावल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है।

केंद्रीय पूल में करीब 402 लाख टन चावल का स्टॉक

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार केंद्रीय पूल में फिलहाल करीब 402 लाख टन चावल उपलब्ध है। पिछले वर्ष 1 अगस्त को यह स्टॉक करीब 380 लाख टन था।

यानी इस वर्ष सरकारी भंडार में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत अधिक चावल मौजूद है। यही बढ़ा हुआ स्टॉक केंद्र के लिए नई फसल की खरीद को लेकर चुनौती बन रहा है।

सरकारी गोदामों में पहले से पर्याप्त मात्रा में चावल मौजूद होने के कारण केंद्र को नई खरीद और मौजूदा भंडार के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।

न्यूनतम बफर स्टॉक से करीब तीन गुना ज्यादा चावल

सरकार खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यूनतम बफर स्टॉक बनाए रखती है। जुलाई महीने के लिए न्यूनतम बफर स्टॉक का मानक करीब 135.40 लाख टन बताया गया है।

इसके मुकाबले केंद्रीय पूल में करीब 402 लाख टन चावल उपलब्ध है। यानी मौजूदा स्टॉक निर्धारित न्यूनतम जरूरत से लगभग तीन गुना है।

ऐसे में नई फसल आने के साथ यदि पहले की तरह बड़े पैमाने पर खरीद जारी रहती है तो भंडारण क्षमता पर दबाव और बढ़ सकता है। इसी वजह से केंद्र ने फिलहाल खरीद का अनुमान कम रखा है।

छत्तीसगढ़ ने केंद्रीय पूल के लिए रखा 89 लाख टन चावल का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 141 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीदी हुई थी।

इस धान की कस्टम मिलिंग के बाद राज्य की ओर से करीब 89 लाख टन चावल केंद्रीय पूल के लिए उपलब्ध कराया गया था।

अब वर्ष 2026-27 के लिए भी छत्तीसगढ़ ने केंद्रीय पूल में 89 लाख टन चावल देने का प्रस्ताव रखा है। ऐसे में केंद्र की ओर से कुल धान खरीद का अनुमान घटाए जाने के बाद राज्य के प्रस्ताव और केंद्रीय जरूरत के बीच तालमेल महत्वपूर्ण हो सकता है।

कस्टम मिलिंग के जरिए केंद्रीय पूल में पहुंचता है चावल

छत्तीसगढ़ में सरकारी स्तर पर खरीदे गए धान की मिलिंग कर चावल तैयार किया जाता है। इसके बाद कस्टम मिलिंग के माध्यम से चावल केंद्रीय पूल में भेजा जाता है।

केंद्रीय पूल में पहुंचने वाला यह चावल देशभर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और केंद्र की विभिन्न खाद्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इसलिए छत्तीसगढ़ जैसे बड़े धान उत्पादक राज्य से केंद्रीय पूल में भेजे जाने वाले चावल की मात्रा राज्य और केंद्र दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

धान का रकबा घटा, लेकिन MSP पर खरीद जारी रहेगी

इस वर्ष धान के रकबे में भी करीब 3.35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि केंद्र की ओर से खरीद का अनुमान कम किए जाने का मतलब यह नहीं है कि किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद बंद कर दी जाएगी।

सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाला धान खरीदा जाएगा। सामान्य धान के लिए इस वर्ष MSP 2,369 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

यानी किसानों के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन कुल सरकारी खरीद का वास्तविक आंकड़ा फसल उत्पादन, बाजार की स्थिति और केंद्र की अंतिम जरूरतों पर निर्भर करेगा।

पिछली खरीदी में छत्तीसगढ़ के किसानों को मिला था 3,100 रुपये प्रति क्विंटल

छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक हुई थी।

राज्य में किसानों को कुल मिलाकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया था। वहीं प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदी की सीमा निर्धारित की गई थी।

पिछली खरीदी व्यवस्था से प्रदेश के 23 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए थे।

किसानों पर क्या होगा असर?

केंद्र की ओर से धान खरीद का अनुमान कम किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल किसानों को लेकर है। हालांकि केवल केंद्रीय खरीद अनुमान घटने से यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि किसानों से सरकारी केंद्रों पर धान की खरीद कम होगी।

राज्य सरकार की अपनी खरीद नीति, केंद्रीय पूल की आवश्यकता, धान का उत्पादन, भंडारण क्षमता और केंद्र-राज्य के बीच तय व्यवस्था के आधार पर वास्तविक खरीद की स्थिति स्पष्ट होगी।

यदि उत्पादन अनुमान से अधिक रहता है और सरकारी खरीद की जरूरत बढ़ती है, तो केंद्र का शुरुआती अनुमान आगे संशोधित भी किया जा सकता है।

भरे गोदामों के बीच खरीद और खाद्य सुरक्षा का संतुलन

केंद्र सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ सरकारी गोदामों में चावल का स्टॉक पहले से पर्याप्त मात्रा में मौजूद है, वहीं दूसरी तरफ देश की खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए लगातार चावल की जरूरत बनी रहती है।

ऐसे में सरकार के लिए नई फसल की खरीद पूरी तरह रोकना व्यावहारिक नहीं है। यही वजह है कि इस बार अनुमानित खरीद में कमी करते हुए भंडारण क्षमता और खाद्य जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।

अंतिम तस्वीर फसल और बाजार की स्थिति से होगी साफ

केंद्र की ओर से 708.64 लाख टन धान खरीद का आंकड़ा फिलहाल प्रारंभिक अनुमान माना जा रहा है। वास्तविक सरकारी खरीद इस आंकड़े से कम या अधिक हो सकती है।

अंतिम स्थिति फसल उत्पादन, किसानों द्वारा सरकारी केंद्रों पर बिक्री, बाजार भाव, केंद्रीय पूल की जरूरत और भंडारण क्षमता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

छत्तीसगढ़ के लिए खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्रीय पूल की जरूरतों में बदलाव का राज्य के 89 लाख टन चावल के प्रस्ताव पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल किसानों के लिए सरकारी MSP खरीद व्यवस्था जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन इस बार केंद्र की खरीद नीति और सरकारी गोदामों में मौजूद स्टॉक के कारण पूरे सीजन में स्थिति पर नजर बनी रहेगी।

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Author: Khabri Chai

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