रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार और काम की गुणवत्ता को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सुकमा और नारायणपुर में सड़क निर्माण में लापरवाही बरतने वाली छह कंपनियों के ठेके निरस्त कर दिए गए हैं। निर्माण कार्यों की समीक्षा के बाद लोक निर्माण विभाग ने यह कार्रवाई की है।

सरकार का फोकस अब बस्तर में सड़क निर्माण परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा कराने पर है। बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की पहुंच के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
छह कंपनियों के ठेके निरस्त
सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान छह कंपनियों की कार्यप्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। इसके बाद संबंधित एजेंसियों के ठेके निरस्त किए गए हैं।
लोक निर्माण विभाग की ओर से अनुबंध की शर्तों के मुताबिक काम नहीं करने वाले ठेकेदारों को पहले कई बार नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं आने पर विभाग ने अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की।
पंजीयन पर भी कसा शिकंजा
सरकार ने कार्रवाई को केवल ठेके निरस्त करने तक सीमित नहीं रखा है। बार-बार नोटिस के बावजूद काम में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों के पंजीयन के नवीनीकरण पर भी रोक लगाई गई है।
कार्रवाई के तहत कुछ ठेकेदारों का पंजीयन निरस्त किया गया है। सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत दिया गया है कि निर्माण कार्यों में लगातार लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
इन ठेकेदारों पर हुई कार्रवाई
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय की ओर से जिन ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई है, उनमें मोहन रेड्डी, मेसर्स शांति विजय कंस्ट्रक्शन, मेसर्स ट्रांसपोर्ट झांका, मेसर्स राघवा कंस्ट्रक्शन, मेसर्स बालाजी इंफ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स पंकज हालदार शामिल हैं।
इनमें मोहन रेड्डी और मेसर्स ट्रांसपोर्ट झांका का पंजीयन निरस्त किया गया है। वहीं अन्य संबंधित ठेकेदारों के पंजीयन के नवीनीकरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए हैं।
सुकमा-नारायणपुर की सड़कों पर विशेष नजर
बस्तर संभाग में सड़क कनेक्टिविटी लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। सुकमा और नारायणपुर जैसे जिलों के दूरस्थ इलाकों में सड़क निर्माण में देरी का असर ग्रामीण आबादी की आवाजाही और विकास कार्यों पर भी पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार, चितलनार-मरियागुम और कोटा-गोलापल्ली मार्ग समेत सुकमा-नारायणपुर क्षेत्र की अन्य सड़क परियोजनाओं में धीमी प्रगति का उल्लेख किया गया है। वहीं नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग के निर्माण से जुड़े मामले में भी संबंधित एजेंसी के पंजीयन नवीनीकरण पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई है।
पुल निर्माण मामले में हाईकोर्ट ने मांगा शपथ पत्र
इसी बीच दंतेवाड़ा में पुल निर्माण की स्थिति और निर्धारित समय-सीमा को लेकर हाईकोर्ट ने भी लोक निर्माण विभाग से जवाब मांगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 के निर्देश के बाद भी संबंधित शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की युगलपीठ ने अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। अधिकारी की ओर से समय मांगे जाने के बाद 15 सितंबर तक शपथपत्र दाखिल करने का आश्वासन दिया गया है।
गुणवत्ता और समयबद्धता पर सरकार का जोर
राज्य सरकार की इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि बस्तर में सड़क और पुल निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता के साथ समयबद्धता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। लंबे समय तक काम अटकाने या बार-बार नोटिस के बावजूद निर्माण गति नहीं बढ़ाने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।
अब सबसे बड़ी चुनौती उन अधूरी सड़क और पुल परियोजनाओं को जल्द पूरा कराने की है, जिनके ठेके निरस्त किए गए हैं। नई एजेंसियों के जरिए इन परियोजनाओं को कितनी तेजी से पूरा कराया जाता है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। बस्तर के दूरस्थ इलाकों में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी सीधे तौर पर विकास, सुरक्षा और आम लोगों की सुविधाओं से जुड़ी हुई है।
Author: Khabri Chai
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