अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से आयुष्मान योजना और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में इलाज के दौरान 30 जून 2026 को जिस पुलिस आरक्षक देवनारायण राम की मौत हो चुकी थी, उनके मोबाइल नंबर पर करीब 42 दिन बाद ऐसा संदेश पहुंचा, जिसमें उन्हें स्वस्थ होकर घर लौटने की जानकारी दी गई।
मृतक के मोबाइल पर आए इस संदेश के बाद परिवार ने अस्पताल और आयुष्मान सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
26 जून को अस्पताल में भर्ती हुए थे आरक्षक
जानकारी के मुताबिक, जशपुर जिले के कटंगखार निवासी पुलिस आरक्षक देवनारायण राम की तबीयत खराब होने के बाद उनकी पत्नी सीमा कुजूर उन्हें 26 जून को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लेकर पहुंचीं।
अस्पताल में उनका उपचार शुरू हुआ, लेकिन इलाज के दौरान 30 जून को उनकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक अस्पताल की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी किया गया, जिसके बाद परिवार ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर दी।

6 अगस्त को आया चौंकाने वाला मैसेज
मामला तब सामने आया जब 6 अगस्त को मृत आरक्षक के मोबाइल नंबर पर आयुष्मान सारथी से जुड़ा संदेश पहुंचा।
संदेश में मरीज को संबोधित करते हुए बताया गया कि वह ‘स्वस्थ होकर घर जा रहा है।’
जिस व्यक्ति की करीब 42 दिन पहले मौत हो चुकी थी, उसके मोबाइल पर इस तरह का संदेश पहुंचने से परिवार हैरान रह गया।
आयुष्मान रिकॉर्ड में भी उठे सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल आयुष्मान योजना से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देवनारायण राम को 26 जून को अस्पताल में भर्ती किया गया था और 30 जून को उनकी मृत्यु हो गई थी। लेकिन सामने आई जानकारी के मुताबिक आयुष्मान से जुड़े रिकॉर्ड में 6 अगस्त की डिस्चार्ज डेट दिखाई दी।
यानी वास्तविक मृत्यु के काफी समय बाद तक डिजिटल रिकॉर्ड में मरीज की उपचार प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी बनी रहने का सवाल उठ रहा है।
पत्नी ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
मृतक की पत्नी सीमा कुजूर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हैं और स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत बताई गई हैं। उन्होंने मामले की जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि जब उनके पति की मृत्यु 30 जून को हो चुकी थी और मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो गया था, तो डिजिटल सिस्टम में उनकी स्थिति समय पर अपडेट क्यों नहीं हुई?
उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि यह तकनीकी गलती थी, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाए और संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया ऑटो-जेनरेटेड मैसेज
मामले पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के सीएस आरसी आर्या के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि यह संदेश ऑटो-जेनरेटेड था और अस्पताल की ओर से सीधे नहीं भेजा गया।
उनके अनुसार मरीज का आयुष्मान कार्ड 30 जून को ही ब्लॉक कर दिया गया था और मरीज के कार्ड से केवल पांच दिन का बिल काटा गया है। अस्पताल प्रबंधन ने मामले को लेकर संबंधित विभाग को पत्र लिखने की बात कही है।
फिर 6 अगस्त को मैसेज कैसे आया?
अस्पताल प्रबंधन के बयान के बाद मामले में एक और सवाल खड़ा हो गया है। अगर मरीज का आयुष्मान कार्ड 30 जून को ही ब्लॉक कर दिया गया था, तो फिर 6 अगस्त को आयुष्मान सारथी सिस्टम से डिस्चार्ज और स्वस्थ होने का संदेश किस रिकॉर्ड के आधार पर जारी हुआ?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह किसी तकनीकी प्रक्रिया का परिणाम था या रिकॉर्ड अपडेट में किसी स्तर पर चूक हुई।
जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच
इस मामले में कई सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे—
- 30 जून को मौत के बाद मरीज का रिकॉर्ड किस स्तर पर अपडेट हुआ?
- आयुष्मान पोर्टल पर 6 अगस्त की डिस्चार्ज डेट क्यों दिखाई गई?
- मृत मरीज के मोबाइल नंबर पर ऑटो-जेनरेटेड मैसेज कैसे जारी हुआ?
- अस्पताल और आयुष्मान रिकॉर्ड में अंतर क्यों रहा?
- क्या मृत्यु के बाद मरीज के नाम पर कोई अतिरिक्त क्लेम या भुगतान प्रक्रिया हुई?
- अगर यह तकनीकी गड़बड़ी थी, तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी किसकी थी?
फिलहाल मामला स्वास्थ्य विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड और आयुष्मान योजना की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें इस मामले की जांच और सामने आने वाले निष्कर्षों पर हैं।
Author: Khabri Chai
Khabri Chai news portal.





