बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत व्याख्याता के खिलाफ छात्राओं का विरोध तेज हो गया है। शिक्षक पर अशोभनीय व्यवहार करने और छात्राओं को गलत नजर से देखने के आरोप लगाते हुए छात्राओं ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर घेराव किया। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने मांग की कि मामले में केवल स्थानांतरण तक सीमित कार्रवाई न हो, बल्कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिक्षक पर गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
छात्राओं ने संस्कृत व्याख्याता संजय दुबे पर कक्षा में अश्लील हरकतें करने और अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। छात्राओं ने यह भी दावा किया कि शिक्षक ने कथित तौर पर फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल की है। हालांकि, डिग्री से संबंधित आरोपों और कथित व्यवहार की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इनकी सच्चाई जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि स्कूल में छात्राओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल होना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
तीन शिक्षकों के स्थानांतरण के बाद भी क्यों नाराज हैं छात्राएं?
मिली जानकारी के अनुसार, छात्राओं की पूर्व शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई थी। रिपोर्ट में प्राचार्य वेद प्रकाश दुबे, संस्कृत शिक्षक संजय दुबे और गणित की शिक्षिका रश्मि गुप्ता को दोषी पाए जाने की बात कही गई है। इसके बाद 9 अक्टूबर को तीनों का संबंधित स्कूल से स्थानांतरण किए जाने की जानकारी सामने आई।
हालांकि, छात्राओं का कहना है कि स्थानांतरण से उनकी शिकायतों का पूरा समाधान नहीं हुआ है। वे मामले में एफआईआर दर्ज कराने और आरोपों की कानूनी जांच चाहती हैं। इसी मांग को लेकर छात्राएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा।
दो घंटे तक चली अधिकारियों के साथ बैठक
प्रदर्शन के दौरान अतिरिक्त कलेक्टर शिव बनर्जी और ज्योति पटेल ने छात्राओं से बातचीत की। अधिकारियों ने उनकी शिकायतें सुनीं और उन्हें समझाने का प्रयास किया। इस दौरान करीब दो घंटे तक बैठक चली, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी ठोस निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई थी।
बैठक में जिला पंचायत के सीईओ संदीप अग्रवाल और नगर निगम आयुक्त भी मौजूद रहे। छात्राओं ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि मामले में ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार पाए जाने वालों की जवाबदेही तय हो सके।
दस्तावेज लेकर पहुंचीं छात्राएं, FIR की मांग
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारी छात्राएं शिकायत से संबंधित दस्तावेज लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची थीं। उन्होंने कथित जालसाजी, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग रखी।
हालांकि, किन कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है, यह शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। केवल आरोप लगने से किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।
कलेक्टर ने दिया जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा
मामले को लेकर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है। छात्राओं की प्रमुख मांग एफआईआर दर्ज कराने और आरोपों की कानूनी जांच कराने की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतों की जांच किस तरह आगे बढ़ती है और उसके आधार पर क्या निर्णय लिया जाता है।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
Author: Khabri Chai
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