रायपुर।
छत्तीसगढ़ में जन्म और मृत्यु के पुराने मामलों का पंजीयन कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। जन्म एवं मृत्यु पंजीयन अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद अब निर्धारित समय से अधिक देरी होने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी का आदेश लेना अनिवार्य होगा। नए प्रावधानों के अनुसार, जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद पंजीयन कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
वहीं, घटना के एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर पंजीयन कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, डिवीजनल मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी। संशोधित व्यवस्था के अनुरूप आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

जन्म-मृत्यु पंजीयन में देरी पर क्या होंगे नियम?
नए प्रावधानों में देरी के आधार पर पंजीयन की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों में जन्म या मृत्यु का पंजीयन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुनिश्चित करना है।
- एक वर्ष तक की देरी: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसे मामलों में संबंधित नियमों के तहत पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
- एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष तक: जिला मजिस्ट्रेट, डिवीजनल मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर पंजीयन किया जाएगा।
- दो वर्ष से अधिक की देरी: प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर संबंधित क्षेत्र का जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार पंजीयन करेगा।
इसलिए जिन नागरिकों के जन्म या परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु का पंजीयन लंबे समय से लंबित है, उन्हें आवेदन करने से पहले लागू प्रक्रिया और संबंधित सक्षम प्राधिकारी की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।
अधिनियम की धारा 13 में किया गया संशोधन
भारत सरकार ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करते हुए जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 अधिनियमित किया है। जारी जानकारी के अनुसार, इसके अंतर्गत अधिनियम की धारा 13 में बदलाव कर उपधारा (3) के स्थान पर नई उपधारा (3) तथा उपधारा (3ए) प्रतिस्थापित की गई हैं।
इन संशोधनों के माध्यम से विलंब से प्राप्त होने वाली जन्म एवं मृत्यु संबंधी सूचनाओं के पंजीयन के लिए प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। अब निर्धारित अवधि से अधिक पुराने मामलों में संबंधित सक्षम प्राधिकारी के आदेश के अनुसार ही पंजीयन की कार्रवाई की जाएगी।
सरगुजा जिला प्रशासन ने जारी किए निर्देश
संशोधित प्रावधानों के पालन के लिए आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। सरगुजा जिले में कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) ने भी संबंधित अधिकारियों को नए नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जन्म या मृत्यु की घटना जिस क्षेत्र में हुई है, उस क्षेत्र के रजिस्ट्रार द्वारा सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नागरिकों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?
जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र कई सरकारी तथा प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इसलिए इन घटनाओं का समय पर पंजीयन कराना जरूरी है। यदि पंजीयन में एक वर्ष से अधिक की देरी हो चुकी है, तो संबंधित नागरिकों को आवेदन से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके मामले में किस अधिकारी का आदेश आवश्यक होगा।
दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होने के कारण आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित स्थानीय जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार या जिला प्रशासन से प्रक्रिया की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।
महत्वपूर्ण बात: पुराने जन्म या मृत्यु का पंजीयन अब केवल आवेदन देने से पूरा नहीं होगा। देरी की अवधि के अनुसार निर्धारित सक्षम प्राधिकारी का आदेश लेना जरूरी होगा।
Author: Khabri Chai
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