रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा में आने वाले दिनों में बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। भाजपा की राष्ट्रीय टीम में संभावित फेरबदल के बीच अब प्रदेश संगठन में भी नई जिम्मेदारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष किरण देव की भूमिका के साथ कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति और नए प्रदेश प्रभारी के नाम को लेकर पार्टी के भीतर मंथन चलने की चर्चा है।

माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही प्रदेश संगठन में नई जिम्मेदारियां तय कर सकता है। हालांकि, अभी किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
कार्यकारी अध्यक्ष के लिए कई नामों पर चर्चा
प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक गतिविधियों को और गति देने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति की चर्चा जोर पकड़ रही है। संभावित चेहरों में संगठन में सक्रिय और मैदानी अनुभव रखने वाले नेताओं के नामों पर विचार किए जाने की संभावना है।
इनमें सांसद संतोष पांडे का नाम प्रमुखता से चर्चा में बताया जा रहा है। इसके अलावा पूर्व विधायक और लंबे समय से संगठन में सक्रिय नेताओं को भी संभावित दावेदारों के तौर पर देखा जा रहा है।
कार्यकारी अध्यक्ष के चयन में क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों के साथ संगठन चलाने की क्षमता और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल को भी अहम माना जा रहा है।
प्रदेश प्रभारी के पद पर भी बदलाव की चर्चा
छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश प्रभारी को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन के केंद्रीय संगठन में नई भूमिका में आने की चर्चाओं के बीच नए प्रभारी के नाम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय महामंत्रियों में से किसी एक नेता को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी के भीतर सौदान सिंह और डॉ. संदीप पाठक के नामों को लेकर भी चर्चा होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इन नामों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
2028 के विधानसभा चुनाव पर नजर
छत्तीसगढ़ भाजपा में संभावित संगठनात्मक बदलाव को 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के सामने अब संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को लगातार सक्रिय रखने की चुनौती है।
ऐसे में नए पदाधिकारियों के जरिए संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है।
क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण भी अहम
प्रदेश में किसी भी बड़े संगठनात्मक बदलाव में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए कार्यकारी अध्यक्ष या अन्य अहम जिम्मेदारियों के लिए चेहरा तय करते समय पार्टी नेतृत्व क्षेत्र, अनुभव, संगठन में पकड़ और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रख सकता है।
पुराने और अनुभवी चेहरों पर भी नजर
संभावित फेरबदल के बीच संगठन में लंबे समय से सक्रिय और केंद्रीय नेतृत्व के साथ बेहतर समन्वय रखने वाले अनुभवी नेताओं की भूमिका बढ़ाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय भाजपा संगठन में संभावित बदलाव का असर छत्तीसगढ़ में भी दिखाई देने लगा है। नए प्रदेश प्रभारी और कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आने वाले दिनों में तस्वीर साफ हो सकती है। इन नियुक्तियों का असर प्रदेश भाजपा की संगठनात्मक रणनीति और 2028 के चुनावी रोडमैप पर भी पड़ सकता है।
Author: Khabri Chai
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