रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा नई बिजली दरों की घोषणा के बाद प्रदेश में बिजली बिलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि विभिन्न राहत योजनाओं और सब्सिडी प्रावधानों के कारण आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा। सरकार ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना समेत अन्य रियायतों के जरिए लाखों घरेलू उपभोक्ताओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
नई टैरिफ व्यवस्था के तहत विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में आंशिक संशोधन किया गया है। घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग स्लैब निर्धारित किए गए हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देने के लिए सब्सिडी व्यवस्था जारी रहेगी।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के अंतर्गत पात्र उपभोक्ताओं को बिजली बिल में विशेष छूट का लाभ मिलता रहेगा। इससे बढ़ी हुई दरों का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। सरकार का दावा है कि योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को महंगाई के दौर में राहत प्रदान करना है।
प्रदेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ अभी भी कई राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है।
हाल के दिनों में स्मार्ट मीटर, बिजली बिल और टैरिफ संशोधन को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठे हैं। ऐसे में सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी भ्रम या शिकायत की स्थिति में बिजली कंपनी के हेल्पलाइन और शिकायत निवारण तंत्र का उपयोग करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती लागत और बुनियादी ढांचे के विस्तार को देखते हुए समय-समय पर टैरिफ संशोधन आवश्यक होता है, लेकिन राहत योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम किया जा सकता है।
फिलहाल नई दरों और राहत योजनाओं को लेकर उपभोक्ताओं की नजर आगामी बिजली बिलों पर टिकी हुई है, जिससे वास्तविक प्रभाव का आकलन हो सकेगा।
Author: Khabri Chai
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