दुर्ग। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) से जुड़े प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भारती कृषि कॉलेज प्रबंधन ने पेपर लीक प्रकरण में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एके दुबे को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। वहीं, मामले में गिरफ्तार किए गए कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया को भी सेवा से बाहर कर दिया गया है। सोनकेसरिया पर प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है।

प्रश्नपत्र लाने-ले जाने की जिम्मेदारी मिली थी
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के सिवनी निवासी योगेश सोनकेसरिया वर्ष 2019 से भारती विश्वविद्यालय से जुड़ा था। करीब एक वर्ष पहले, यानी 2025 से उसे विश्वविद्यालय से प्रश्नपत्र लाने और ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
आरोप है कि इसी जिम्मेदारी के चलते उसे प्रश्नपत्रों तक पहुंच मिली और उसने कथित तौर पर इसी का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश को अंजाम दिया। गिरफ्तारी के बाद कॉलेज प्रबंधन ने भी उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे सेवा से बाहर कर दिया।
चंदखुरी में किराए के मकान में रहता था प्रोफेसर
योगेश सोनकेसरिया पिछले करीब तीन वर्षों से दुर्ग के पुलगांव थाना क्षेत्र के चंदखुरी गांव में दुर्गा चौक के पास किराए के मकान में रह रहा था। वह यहां अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था।
बताया गया है कि परिवार के दो वर्षीय छोटे बच्चे की देखभाल के चलते उसकी पत्नी कुछ समय से सिवनी स्थित अपने ससुराल भैरवगंज में रह रही थी। प्रोफेसर की गिरफ्तारी के बाद चंदखुरी स्थित उसके किराए के मकान पर ताला लगा हुआ है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह भूपेंद्र चंद्राकर के मकान में करीब 2 हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर रहता था। पड़ोसियों ने बताया कि वह सामान्य तरीके से रहता था और उन्हें उसकी किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी नहीं थी।
मेडिकल उपकरण से प्रश्नपत्र तक पहुंचने का आरोप
पेपर लीक मामले में प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कॉलेज स्तर पर प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखने और उनकी निगरानी की व्यवस्था की गई थी।
इसके बावजूद आरोप है कि प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ने एंडोस्कोपी जैसे मेडिकल उपकरण का इस्तेमाल कर प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई और उसे बाहर निकाला। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाने का गंभीर मामला होगा।
प्राचार्य पर भी हुई कार्रवाई
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी कॉलेज प्रबंधन की थी। पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही को गंभीरता से लिया गया।
इसी के चलते लंबे समय से पदस्थ प्राचार्य डॉ. एके दुबे को बर्खास्त कर दिया गया। प्रबंधन की ओर से इसे प्रश्नपत्र की सुरक्षा में हुई कथित प्रशासनिक चूक से जोड़कर देखा जा रहा है।
कुलाधिपति ने कहा- सुरक्षा व्यवस्था थी चाक-चौबंद
भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलाधिपति डॉ. सुनील चंद्राकर ने बताया कि मामले के सामने आने के बाद प्राचार्य डॉ. एके दुबे को लापरवाही के कारण और प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया को कॉलेज से निकाल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कॉलेज की प्रश्नपत्र सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी, लेकिन आरोपित ने कथित तौर पर एंडोस्कोपी जैसे मेडिकल यंत्र का इस्तेमाल कर जिस तरह प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई, वह गंभीर और अक्षम्य मामला है।
जांच में सामने आएंगे पेपर लीक के और राज
फिलहाल मामले में पुलिस और संबंधित स्तर पर जांच जारी है। आरोपी प्रोफेसर की गिरफ्तारी के बाद कॉलेज प्रबंधन की कार्रवाई से मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र तक आरोपी की पहुंच किस तरह बनी, क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी और प्रश्नपत्र लीक होने से पहले या बाद में वह किन-किन लोगों तक पहुंचा।
पेपर लीक की इस घटना ने परीक्षा प्रणाली में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। प्राचार्य की बर्खास्तगी और आरोपी प्रोफेसर को सेवा से बाहर किए जाने के बाद अब जांच में सामने आने वाले अन्य तथ्यों पर नजर बनी हुई है।
Author: Khabri Chai
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