बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र से जुड़े एक NDPS मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामले में कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी करते हुए शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि जिस पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज कराई और जिसके आधार पर FIR दर्ज हुई, उसी अधिकारी को आगे मामले की जांच करने और चार्जशीट पेश करने की अनुमति कैसे दी गई।
मामला 2925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) गोलियों की बरामदगी से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दावा किया गया है कि यह पूरा प्रकरण पारिवारिक विवाद के चलते एक महिला को साजिश के तहत फंसाने के उद्देश्य से तैयार किया गया।
छत पर मिला था संदिग्ध बैग
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कथित प्रतिबंधित दवाओं से भरा पॉलीथिन बैग महिला के पास से सीधे बरामद नहीं हुआ था। उनके अनुसार, करीब 14 वर्षीय एक नाबालिग बच्चा पतंग उड़ाते समय घर की छत पर गया था, जहां उसे यह बैग मिला।
बताया गया कि बच्चे ने बैग में मौजूद दवाओं के संबंध में मोबाइल फोन के जरिए जानकारी जुटाई और इसके बाद अपनी मां को इसकी जानकारी दी। परिवार का कहना है कि बैग को अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे वाली जगह पर रख दिया गया था।

नाबालिग को थाने में बैठाने का भी आरोप
याचिका में पुलिस की कार्रवाई पर एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 14 वर्षीय बच्चे के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं होने के बावजूद पुलिस उसे थाने ले गई और करीब 10 घंटे तक वहां बैठाकर रखा गया।
याचिकाकर्ताओं ने इस पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि प्रतिबंधित दवाओं वाला बैग आखिर कहां से आया और उसे घर की छत पर किसने रखा था।
हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी की भूमिका पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच की प्रक्रिया और पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने DGP को निर्देश दिया है कि वह शपथ पत्र के माध्यम से जांच अधिकारी के पिछले आचरण और मामले में उनकी भूमिका से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करें।
कोर्ट का मुख्य सवाल यह है कि यदि किसी अधिकारी ने कथित रूप से प्रारंभिक शिकायत दर्ज कराई और उसी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज हुई, तो उसी अधिकारी को मामले की आगे की जांच करने और चार्जशीट पेश करने की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई।
निष्पक्ष जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके तहत दवाओं के स्रोत, पॉलीथिन बैग को छत पर रखने वाले व्यक्ति, पूरे घटनाक्रम में संबंधित लोगों की भूमिका और महिला की गिरफ्तारी की परिस्थितियों की जांच की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने नाबालिग के मोबाइल फोन को भी फोरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात कही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चे ने दवाओं के संबंध में इंटरनेट पर क्या जानकारी खोजी थी और घटना के समय क्या परिस्थितियां थीं।
24 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अथवा अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने को कहा है। DGP को भी कोर्ट के निर्देश के मुताबिक शपथ पत्र के जरिए जवाब प्रस्तुत करना होगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी। उस दिन पुलिस की जांच प्रक्रिया, जांच अधिकारी की भूमिका और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर कोर्ट के समक्ष स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
Author: Khabri Chai
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