RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग, निजी स्कूल संघ ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को पत्र लिखकर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की मांग की है। संघ का कहना है कि वर्तमान में सरकार द्वारा दी जा रही राशि शिक्षा की वास्तविक लागत की तुलना में काफी कम है, जिससे निजी स्कूलों को आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

संघ ने अपने पत्र में मांग की है कि प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रतिपूर्ति राशि को वर्तमान 7 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रति छात्र किया जाए, जबकि माध्यमिक कक्षाओं के लिए 11,500 रुपये से बढ़ाकर 22 हजार रुपये प्रति छात्र किया जाए। स्कूल संचालकों का कहना है कि महंगाई, शिक्षकों के वेतन, भवन रखरखाव, बिजली-पानी, डिजिटल शिक्षा संसाधनों और अन्य जरूरी सुविधाओं के खर्च में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में मौजूदा प्रतिपूर्ति राशि से स्कूलों का संचालन करना कठिन होता जा रहा है।

संघ के पदाधिकारियों के अनुसार शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। इन छात्रों की शिक्षा का खर्च सरकार द्वारा निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति के रूप में दिया जाता है। इस योजना का उद्देश्य सभी वर्गों के बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन लंबे समय से प्रतिपूर्ति राशि में संशोधन नहीं होने से स्कूलों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

स्कूल प्रबंधन का यह भी कहना है कि यदि समय पर और पर्याप्त प्रतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराई जाती है, तो इससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को व्यावहारिक और संतुलित निर्णय लेना चाहिए, ताकि निजी स्कूलों और विद्यार्थियों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।

स्कूल संघ ने शिक्षा मंत्री से इस मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। फिलहाल इस मामले में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संस्थान इस पर जल्द निर्णय की उम्मीद जता रहे हैं।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

Khabri Chai news portal.

Advertisement Carousel
space for Adv.