नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार की मांग का समर्थन कर रहे सोनम वांगचुक को शनिवार को दिल्ली पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल पहुंचाया। उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया।
वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। वे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में शामिल हुए थे, जो 20 जून से कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है।
अनशन के 20वें दिन शुक्रवार को जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने देशवासियों से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि जनता की भागीदारी ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।

वीडियो संदेश में उन्होंने अपनी सेहत का जिक्र करते हुए कहा, “मैं अभी जीवित हूं। मेरे शरीर का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा क्षीण हो चुका है। पहले शरीर की चर्बी खत्म होती है, फिर मांसपेशियां और उसके बाद अंग प्रभावित होते हैं। अंत में मस्तिष्क प्रभावित होता है। अभी वह समय नहीं आया है।”
सरकार पर दबाव बनने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की संभावना से जुड़े सवाल पर वांगचुक ने कहा कि लोग अक्सर जन आंदोलनों की ताकत को कम आंकते हैं। उन्होंने कहा, “भारत के लोग अपने बच्चों के भविष्य और शिक्षा से ज्यादा प्यार करते हैं या प्याज से? प्याज की कीमतों को लेकर पहले भी सरकारें गिर चुकी हैं।”
फिलहाल सोनम वांगचुक का इलाज RML अस्पताल में जारी है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी बनी हुई है।
Author: Khabri Chai
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