Ujjain Khade Hanuman Temple: खड़े हनुमान मंदिर पर प्रशासन का बड़ा फैसला, बिना सहमति नहीं हटेगी प्रतिमा; विरोध के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए सड़क चौड़ीकरण की जद में आया करीब 170 साल पुराना मंदिर; हिंदू संगठनों ने किया हनुमान चालीसा पाठ, प्रशासन ने कहा- आस्था और विकास दोनों का रखा जाएगा ध्यान

उज्जैन। प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर चल रहे विवाद के बीच उज्जैन जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन ने कहा है कि श्रद्धालुओं और विभिन्न हिंदू संगठनों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बिना आपसी सहमति के मंदिर या हनुमान प्रतिमा को हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

170 साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर हो रहा शिफ्ट! सन् 1857 में हुई थी स्थापना,  प्रशासन क्यों कर रहा पुनर्स्थापना | khade hanuman temple ujjain shift 1857  history road ...

प्रशासन के इस बयान के बाद फिलहाल विवाद के शांत होने के संकेत हैं। वहीं, मंदिर और आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है।

प्रतिमा हटाने की आशंका पर श्रद्धालुओं ने किया विरोध

प्रतिमा को हटाए जाने की आशंका के बीच मंगलवार और बुधवार शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे। हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने यहां हनुमान चालीसा का पाठ किया। ढोल-ताशों के साथ जय श्रीराम के नारे भी लगाए गए।

प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि हनुमानजी की प्रतिमा को उसी स्थान पर सुरक्षित रखा जाए और मंदिर का यथास्थान संरक्षण किया जाए। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर लंबे समय से आस्था से जुड़े इस धार्मिक स्थल को हटाना उचित नहीं होगा।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़ा है पूरा मामला

दरअसल, मंदिर को लेकर विवाद सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के बीच सामने आया है। उज्जैन में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़कों के चौड़ीकरण समेत कई विकास कार्य किए जा रहे हैं।

इसी परियोजना की जद में करीब 170 साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर भी आया है। प्रशासन की योजना सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की है। इसी क्रम में मंदिर की चारदीवारी और भवन के कुछ हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की गई थी।

हालांकि, मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था जुड़ी होने के कारण मामला संवेदनशील हो गया।

प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश की गई

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रशासन की ओर से प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसके बाद प्रतिमा को फिलहाल सुरक्षित रखा गया।

प्रतिमा को हटाए जाने की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों में नाराजगी बढ़ गई। लोगों ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया और प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की।

प्रशासन ने कहा- आस्था से समझौता नहीं

विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐसे फैसले से बचा जाएगा, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों। प्रशासन के मुताबिक, सिंहस्थ 2028 के लिए विकास और यातायात व्यवस्था से जुड़े काम जरूरी हैं, लेकिन उज्जैन की धार्मिक विरासत और आस्था के प्रमुख केंद्रों का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।

प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि मंदिर और प्रतिमा को लेकर आगे की कार्रवाई आपसी सहमति और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ही की जाएगी।

मंदिर में बढ़ी श्रद्धालुओं की आवाजाही

विवाद के बाद खड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर से उनकी लंबे समय से आस्था जुड़ी हुई है और वे प्रतिमा को हटाए जाने के पक्ष में नहीं हैं।

फिलहाल प्रशासन के बयान के बाद श्रद्धालुओं को राहत मिली है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सिंहस्थ 2028 की विकास योजनाओं और करीब 170 साल पुरानी धार्मिक विरासत के बीच ऐसा समाधान निकले, जिसमें सड़क चौड़ीकरण के साथ खड़े हनुमान मंदिर की आस्था और धार्मिक महत्व भी सुरक्षित रहे।

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Author: Khabri Chai

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