‘हिंदू राष्ट्र’ पर बयान देकर सुर्खियों में आईं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो | बड़ा बयान

नई दिल्ली: प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की दूसरी पत्नी गीतांजलि आंग्मो इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उनके ‘सनातन धर्म’ और ‘हिंदू राष्ट्र’ से जुड़े पुराने बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जहां वह हिंदू राष्ट्र की वकालत करती नजर आ रही हैं। दरअसल हाल ही में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा छात्र आंदोलन हुआ। इस आंदोलन को समर्थन देते हुए सोनम वांगचुक ने 26 दिनों का लंबा अनशन किया था। वांगचुक के इस संघर्ष ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा और आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

लेकिन जैसे ही इस आंदोलन की सरगर्मी थोड़ी कम हुई, एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, सोनम की पत्नी गीतांजलि का एक पुराना वीडियो और बयान इंटरनेट पर अचानक वायरल हो गया है, जिसके बाद उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है।

विवाद क्या है और क्यों हो रही है ट्रोलिंग?

सोशल मीडिया पर वांगचुक की पत्नी और लद्दाख के हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की सह-संस्थापक गीतांजलि आंग्मो का एक पुराना वीडियो फिर से सामने आया है। यह वीडियो मूल रूप से सुब्रमण्यम स्वामी के यूट्यूब चैनल पर एक इंटरव्यू का हिस्सा था, जिसे ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने शेयर किया है। इन क्लिप्स में, आंग्मो भारत के लिए हिंदू सभ्यतागत ढांचे की वकालत करती हैं, संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाती हैं, शासन की राष्ट्रपति प्रणाली का समर्थन कर रही हैं। वने राम मंदिर आंदोलन का समर्थन कर रही हैं और ‘आर्य आक्रमण सिद्धांत’ को खारिज करती सुना जा रही हैं।

उनका सबसे विवादास्पद बयान संविधान से “धर्मनिरपेक्ष” शब्द को हटाने की मांग थी। वीडियो में वह कहती हैं, “इसीलिए हमें अपने संविधान से ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को फिर से औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त करना होगा। मुझे नहीं पता कि हमने इसे वहां क्यों रखा, क्योंकि ‘धर्मनिरपेक्ष’ की पृष्ठभूमि बहुत अलग है। इसका मकसद राज्य और धर्म को अलग रखना है। जबकि भारत में, हम ‘राजा ऋषि’ की बात करते हैं, हम ‘फिलॉसफर किंग’ की बात करते हैं, हम अपने जीवन के हर पहलू को धर्म से संचालित करने की बात करते हैं। तो हम राज्य और धर्म को अलग कैसे रख सकते हैं? क्योंकि भारत में यह धर्म नहीं है।”

आंगमो ने दार्शनिक और राष्ट्रवादी श्री अरबिंदो का हवाला देते हुए यह भी तर्क दिया कि भारत की संसदीय प्रणाली देश की परंपराओं के अनुकूल नहीं थी। उन्होंने कहा, “वह कहते हैं कि संसदीय प्रणाली भारत का ‘स्वधर्म’ नहीं है, और भारत को अपनी गलती का एहसास होने में 100 साल लगेंगे… श्री अरबिंदो ने कहा था कि राष्ट्रपति प्रणाली, जिसमें बहुत मजबूत पंचायत व्यवस्था और ढीले संघीय राज्य हों, वही भारतीय लोकतंत्र का भविष्य है।

सनातन धर्म और राम मंदिर पर क्या बोलीं?

आंगमो ने सनातन धर्म के बारे में भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत ही इसका एकमात्र संरक्षक है और हिंदू राष्ट्र का विचार केवल राजनीतिक नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब हम हिंदू राष्ट्र या हिंदुत्व की बात करते हैं, तो हमें अब तक की सोच से कहीं आगे और गहराई से सोचने की जरूरत है। यह कोई अंध-राष्ट्रवाद या सिर्फ राजनीतिक नारेबाजी नहीं है। हमें असल में ठोस काम करना होगा।”

उन्होंने राम मंदिर के निर्माण का बचाव किया और इसे भारत की “सामूहिक चेतना” के लिए जरूरी बताया, जबकि कई हिंदू मंदिरों की मौजूदा हालत की आलोचना की। उन्होंने कहा, “हमने यह राम मंदिर बनाया, जो इस देश की सामूहिक चेतना के लिए बहुत जरूरी था। लेकिन पहले मंदिर क्या थे? वे सिर्फ पूजा की जगह नहीं थे, बल्कि सीखने की भी जगह थे।”

भारी ट्रोलिंग शुरू हो गई

इन बयानों के सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनकी भारी ट्रोलिंग शुरू हो गई है। लोग उन पर और वांगचुक पर तीखे सवाल दाग रहे हैं। इस गुस्से की मुख्य वजह वह वैचारिक विरोधाभास है, जो जनता को महसूस हो रहा है। दरअसल एक तरफ सोनम वांगचुक लद्दाख के लिए ‘छठी अनुसूची’ लागू करवाने के लिए लगातार संविधान की दुहाई देते हुए संघर्ष करते रहे हैं, और CJP के एक बड़े छात्र आंदोलन का चेहरा बने। दूसरी तरफ, उनकी पत्नी द्वारा संविधान के उसी मूल ढांचे (धर्मनिरपेक्षता) को हटाने की बात कहना, लोगों को पाखंड लग रहा है।

आखिर कौन हैं गीतांजलि आंग्मो?

गीतांजलि जे. आंग्मो कोई साधारण चेहरा नहीं हैं। वह एक बेहद सफल सामाजिक उद्यमी और शिक्षाविद् हैं। उनका जन्म ओडिशा के बालासोर में एक पंजाबी जैन परिवार में हुआ था। फकीर मोहन यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, भुवनेश्वर (XIMB) से मार्केटिंग और फाइनेंस में MBA की डिग्री हासिल की।

 

कॉर्पोरेट सेक्टर में कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने हेल्थकेयर, शिक्षा और वेलनेस के क्षेत्र में ‘हेलिओस बुक्स’, ‘ओम हॉस्पिटल्स’ और ‘लव योर लिवर फाउंडेशन’ जैसे कई उपक्रम शुरू किए। 2017 में उन्होंने सोनम वांगचुक के साथ मिलकर लद्दाख में ‘हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स’ (HIAL) की स्थापना की, जो पहाड़ी समुदायों के लिए शिक्षा का एक नया मॉडल पेश करता है। निजी जीवन में, गीतांजलि की गहरी रुचि श्री अरबिंदो के दर्शन, वेदों और उपनिषदों में रही है, और वह एक प्रशिक्षित ओडिसी नर्तकी व कराटे में भी माहिर हैं। उन्होंने 2025 में सोनम वांगचुक से शादी की थी। गीतांजलि आंग्मो से पहले सोनम वांगचुक की पहली पत्नी रेबेका नॉर्मन थीं।

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Author: Khabri Chai

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