। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में करोड़ों नहीं बल्कि लाखों रुपये की संदिग्ध भुगतान प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष ने 1400 फर्जी हितग्राहियों के खातों में 61.37 लाख रुपये भेजे जाने के मामले में सरकार को घेरा, जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इसे पोर्टल हैकिंग और साइबर अपराध का मामला बताया।
1400 फर्जी खातों में पहुंची योजना की राशि
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने आरोप लगाया कि बस्तर संभाग में वर्ष 2025 से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत फर्जी पंजीयन कर करीब 1400 लोगों के खातों में 61.37 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। उन्होंने कहा कि यह भुगतान तीन अलग-अलग किस्तों में किया गया, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।विधायक ने दावा किया कि यह अनियमितता केवल दंतेवाड़ा तक सीमित नहीं हो सकती और जांच होने पर अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आ सकते हैं।
मंत्री बोलीं, पोर्टल हैक कर की गई धोखाधड़ी
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला साइबर हैकिंग का सामने आया है। उनके अनुसार, भारत सरकार के पोर्टल से छेड़छाड़ कर दूसरे राज्यों के करीब 1400 लोगों के खातों में योजना की राशि भेजी गई।उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में मामला सामने आने के बाद संचालनालय और केंद्र सरकार को इसकी जानकारी दी गई। इसके साथ ही जांच समिति गठित की गई, एफआईआर दर्ज कराई गई और पूरे मामले की जांच साइबर पुलिस को सौंप दी गई है।

विभागीय अधिकारियों की भूमिका से मंत्री ने किया इनकार
मंत्री ने सदन में कहा कि अब तक की जांच में विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साइबर अपराध का मामला है और तकनीकी जांच जारी है।हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर विभागीय जांच भी कराई जाएगी।
विपक्ष ने उठाए कई सवाल
कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजना के तहत आवेदन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और सीडीपीओ समेत कई स्तरों पर सत्यापित होते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में फर्जी लाभार्थियों का पंजीयन और तीन बार भुगतान होना विभागीय लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है।उन्होंने पूछा कि जब जांच पूरी भी नहीं हुई है तो विभागीय अधिकारियों को पहले ही क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है।
जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया बहिर्गमन
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस और नोकझोंक के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।
मछली पालन नीति में बदलाव का ऐलान
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य की मछली पालन नीति में मौजूद विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया।इस पर मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि वर्ष 2022 में बनाई गई मछली पालन नीति में संशोधन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नई नीति तैयार की जा रही है, जिसमें स्थानीय समुदाय और आदिवासियों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।नेता प्रतिपक्ष ने वन क्षेत्रों के तालाबों पर टैक्स सहित अन्य प्रावधानों पर आपत्ति जताई, जबकि विधायक अजय चंद्राकर ने भी मौजूदा नीति में सुधार की जरूरत बताई। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी सुझावों को नई नीति में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
Author: Khabri Chai
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