छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले को लेकर कांग्रेस ने एनआईए जांच और जगदलपुर स्थित एनआईए अदालत के फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे पीड़ित परिवारों और जनता के लिए “आधा-अधूरा न्याय” बताते हुए घटना के पीछे कथित साजिश, राजनीतिक पहलुओं और बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की है।
कांग्रेस कमेटी की ओर से रविवार को बालोद स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान पार्टी नेताओं ने झीरम कांड से जुड़े अपने पक्ष और प्रकरण से संबंधित तथ्यों को मीडिया के सामने रखा।
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कांग्रेस ने फैसले पर उठाए सवाल
जिला कांग्रेस अध्यक्ष हिरवानी ने कहा कि 23 मई 2013 को हुए झीरम घाटी नरसंहार में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व समेत 29 लोगों की हत्या हुई थी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े हमले के बावजूद एनआईए अदालत के फैसले के बाद भी घटना के पीछे मौजूद कथित साजिशकर्ताओं और राजनीतिक पहलुओं से जुड़े कई सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि जांच का दायरा सीमित रहा और घटना के राजनीतिक पहलुओं की गहराई से पड़ताल नहीं की गई। पार्टी नेताओं ने कहा कि पीड़ित परिवारों और प्रदेश की जनता को इस घटना की पूरी सच्चाई जानने का अधिकार है।
बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका पर कांग्रेस का सवाल
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों को गिरफ्तार कर दोषी ठहराया गया, उनमें नक्सली संगठन से जुड़े निचले स्तर के सदस्य और खाना बनाने तथा राशन पहुंचाने जैसे कार्यों से जुड़े लोग शामिल थे।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि झीरम जैसे बड़े नरसंहार की योजना बनाई गई थी, तो इसके पीछे मौजूद कथित बड़े नक्सली नेताओं और साजिशकर्ताओं की भूमिका की जांच किस स्तर तक हुई?
पार्टी नेताओं ने मांग की कि इस पूरे मामले में जनता के सामने यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि हमले की साजिश किस स्तर पर रची गई और घटना के पीछे मौजूद लोगों की भूमिका की जांच किस तरह की गई।
चार्जशीट से बड़े नक्सली नेताओं के नाम हटाने पर सवाल
कांग्रेस ने प्रारंभिक जांच और एफआईआर में कथित तौर पर सामने आए कुछ बड़े नक्सली नेताओं के नाम बाद में चार्जशीट में नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाया।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि यह सार्वजनिक किया जाए कि किन परिस्थितियों में इन नामों को बाद की जांच और चार्जशीट से हटाया गया। पार्टी का कहना है कि जब तक इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक झीरम कांड की पूरी सच्चाई सामने आने का दावा अधूरा रहेगा।
संगीता सिन्हा ने तत्कालीन सरकार की भूमिका पर लगाए आरोप
विधायक और प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने आरोप लगाया कि झीरम मामले में तत्कालीन सरकार की भूमिका शुरुआत से ही संदेह के घेरे में रही है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न स्तरों पर जांच को प्रभावित करने और घटना की पूरी सच्चाई सामने आने से रोकने के प्रयास किए गए।
संगीता सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि झीरम कांड को केवल एक नक्सली हमला मानकर इसकी जांच सीमित नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक घटना के राजनीतिक, प्रशासनिक और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने उठाई व्यापक जांच की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। ऐसे में घटना से जुड़े हर पहलू की सच्चाई सामने आना जरूरी है।
पार्टी ने मांग की कि कथित साजिशकर्ताओं, बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक पहलुओं समेत सभी बिंदुओं की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को घटना की पूरी सच्चाई पता चल सके।
कांग्रेस ने कहा कि झीरम कांड केवल एक आपराधिक या नक्सली हिंसा की घटना नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है। इसलिए इसके सभी अनसुलझे सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
Author: Khabri Chai
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