Delhi News: सत्य निकेतन हादसे के बाद सख्त होंगे बिल्डिंग नियम, पुरानी इमारतों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग ढहने की घटना के बाद सरकार ने भवनों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को बताया कि दिल्ली सरकार अधिकारियों के साथ मिलकर नए बिल्डिंग रूल का ड्राफ्ट तैयार कर रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा और यह प्रमाणित करना जरूरी होगा कि भवन रहने या सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित है।

सरकार का फोकस खासतौर पर उन पुरानी इमारतों पर है, जिनका इस्तेमाल PG, नर्सिंग होम, स्कूल या अन्य सार्वजनिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

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बिना सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं मिलेंगी पब्लिक यूटिलिटी सेवाएं

मुख्यमंत्री के मुताबिक जिन पुरानी इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणित नहीं होगी, वहां पब्लिक यूटिलिटी से जुड़ी सेवाएं शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस दायरे में PG, नर्सिंग होम और स्कूल जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक उपयोग में आने वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर पहले से जांच हो और किसी संभावित हादसे को टाला जा सके।

सत्य निकेतन हादसे के जिम्मेदारों पर कार्रवाई

सत्य निकेतन हादसे को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि घटना के लिए जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश सोमवार को ही जारी किया जाएगा।

सरकार की ओर से हादसे की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने पर कार्रवाई की जा रही है। नए नियमों के जरिए भविष्य में भवनों की सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही पर जवाबदेही तय करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।

प्रभावित छात्रों के लिए हॉस्टल में रहने की व्यवस्था

हादसे के बाद प्रभावित हुए छात्रों के सामने रहने की समस्या को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित छात्रों को कॉलेज हॉस्टलों में ठहराया जा रहा है।

इसके अलावा छात्रों और उनके परिवारों को जरूरत के अनुसार आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की भी बात कही गई है। सरकार का कहना है कि हादसे से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के साथ उनकी सुरक्षा और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

पुरानी और जर्जर इमारतों की होगी जांच

सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर सरकार का फोकस बढ़ गया है। प्रस्तावित नए बिल्डिंग रूल के तहत पुरानी इमारतों की संरचनात्मक स्थिति की जांच कराना जरूरी किया जा सकता है।

स्ट्रक्चरल ऑडिट के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कोई भवन सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित है या नहीं। सुरक्षा प्रमाणित होने के बाद ही संबंधित गतिविधियों की अनुमति दिए जाने की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।

सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों पर विशेष नजर

नए नियमों का उद्देश्य केवल भवनों की जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन इमारतों पर भी निगरानी बढ़ाने की कोशिश होगी, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते या आते-जाते हैं।

PG, स्कूल और नर्सिंग होम जैसी जगहों पर भवन की संरचनात्मक सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार का मानना है कि नियमित ऑडिट और सुरक्षा प्रमाणन से संभावित दुर्घटनाओं की पहचान पहले ही की जा सकेगी।

सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रस्तावित यह नई व्यवस्था दिल्ली में भवन सुरक्षा के नियमों को और सख्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार की कोशिश है कि पुरानी इमारतों की स्थिति की समय रहते जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और सार्वजनिक उपयोग की इमारतों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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Author: Khabri Chai

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