रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर कई दिनों से जारी छात्र आंदोलन अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों पर बड़ा फैसला लेते हुए JSSC-CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाओं एवं प्रक्रियाओं को रद्द करने की घोषणा की है। सरकार के इस फैसले के बाद परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों की जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि TDPL से जुड़ी सभी गतिविधियां पूरी तरह रद्द की जा रही हैं। इसके तहत संस्था द्वारा आयोजित परीक्षाएं, उनके परिणाम, चयनित अभ्यर्थी और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया अब निरस्त मानी जाएगी। सरकार के इस निर्णय से TDPL के तहत हुई भर्तियों और परीक्षाओं पर भी सीधा असर पड़ेगा।
JSSC-CGL भी रद्द, हजारों अभ्यर्थियों पर असर
सरकार ने JSSC-CGL यानी झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JGGLCCE) को भी रद्द करने का फैसला लिया है। कैबिनेट के निर्णय के बाद परीक्षा, उसके परिणाम और चयन प्रक्रिया को समाप्त माना जाएगा।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जो CGL परीक्षा में चयनित हो चुके थे और जिनकी नियुक्ति एवं जॉइनिंग की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी थी। चयनित अभ्यर्थियों के एक वर्ग ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि उन्होंने अदालत के आदेशों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर परीक्षा पास की थी। उनका कहना है कि पूरी परीक्षा रद्द करने से उनका भविष्य संकट में पड़ गया है और वे इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे।
2014 से अब तक की परीक्षाओं की जांच
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा विवाद को लेकर जांच को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। उनके मुताबिक SIT और CID की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि CGL प्रक्रिया से चयनित कुछ लोगों के JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार होने से एक बड़े नेटवर्क की आशंका सामने आई है।
सरकार ने 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। CID को स्वतंत्र और गहन जांच करने के लिए कहा गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में छोटी-बड़ी सभी अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों की कई मांगों पर बनी सहमति
सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। छात्रों के अनुसार:
– JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग मंजूर।
– JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग मंजूर।
– परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की जांच जारी रखने पर सहमति।
– रिश्वत के आरोपों की ED जांच मंजूर।
– दागी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग मंजूर।
– फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग मंजूर।
– तय भर्ती कैलेंडर लागू करने की मांग पर अभी सहमति नहीं बनी।
– JPSC की गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग सरकार ने स्वीकार नहीं की।
छात्र नेताओं का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण मांगें अभी बाकी हैं, इसलिए सरकार के ताजा फैसले के बावजूद आंदोलन को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
TDPL की 15 परीक्षाओं पर असर
सरकार के फैसले का असर TDPL से जुड़ी कुल 15 परीक्षाओं पर बताया गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
1. संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा – रेगुलर
2. संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा – बैकलॉग
3. संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा – PT
4. सिविल जज – जूनियर डिवीजन
5. सहायक लोक अभियोजक – APP बैकलॉग
6. इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज भर्ती
7. परियोजना प्रबंधक भर्ती
8. सहायक लोक अभियोजक – APP रेगुलर
9. बॉयलर इंस्पेक्टर भर्ती
10. झारखंड पात्रता परीक्षा – JET
JSSC की 5 परीक्षाएं भी विवाद के घेरे में
वहीं JSSC से जुड़ी पांच परीक्षाओं पर भी इस फैसले का असर पड़ा है। इनमें प्रमुख रूप से:
– JGGLCCE यानी JSSC-CGL
– झारखंड तकनीकी/विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा
– झारखंड फील्ड वर्कर प्रतियोगिता परीक्षा
– झारखंड वनरक्षक प्रतियोगिता परीक्षा
– झारखंड PGT शिक्षक नियुक्ति परीक्षा
शामिल हैं।
आंदोलनकारी छात्रों में खुशी, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ संघर्ष
सरकार के फैसले के बाद रांची में आंदोलन कर रहे JPSC-JSSC अभ्यर्थियों में खुशी देखी गई। कई छात्र भावुक नजर आए और उन्होंने इसे अपने आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। हालांकि छात्र नेता पीयूष कुमार ने स्पष्ट किया कि यह केवल पहला कदम है।
उनका कहना है कि 11 से 13 बैच से जुड़ी मांगें, CBI जांच समेत कई मुद्दे अभी बाकी हैं। इसलिए आंदोलन के अगले चरण को लेकर छात्रों की रणनीति आगे भी जारी रह सकती है।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह लंबे संघर्ष का परिणाम है, लेकिन जब तक शिक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार से स्थायी और मजबूत व्यवस्था की गारंटी की मांग की।
16वें दिन खत्म हुई भूख हड़ताल
मुख्यमंत्री द्वारा JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद छात्र नेताओं उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति ने सदर अस्पताल में अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। इस दौरान झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी और दीपिका पांडे सिंह मौजूद रहे।
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि उनकी 16वें दिन की भूख हड़ताल सम्मानजनक तरीके से समाप्त हुई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री दीपिका पांडे और विधायक जयराम महतो की संयुक्त पहल से आंदोलनकारियों की जिन मांगों को लेकर संवैधानिक और शांतिपूर्ण संघर्ष चल रहा था, उनमें कई को सरकार ने स्वीकार किया है।
उन्होंने सरकार, मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि आगे के सुधारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
सरकार के फैसले से नया कानूनी विवाद भी संभव
सरकार के इस फैसले ने जहां आंदोलनकारी छात्रों को बड़ी राहत दी है, वहीं पहले से चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को रद्द करना उचित नहीं है।
अब इस पूरे मामले में कानूनी लड़ाई की संभावना भी बढ़ गई है। चयनित अभ्यर्थी अदालत का रुख करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के फैसले की न्यायिक समीक्षा और परीक्षा प्रणाली में नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
MMDR एक्ट पर भी सरकार की नजर
मुख्यमंत्री ने MMDR एक्ट में केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों को लेकर भी जल्द बैठक बुलाने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर राज्य में विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना भी जताई गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब झारखंड में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या JPSC-JSSC विवाद पर सरकार का यह कठोर फैसला परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार की नींव बनेगा, या चयनित अभ्यर्थियों की संभावित कानूनी चुनौती से विवाद का नया अध्याय शुरू होगा? आने वाले दिनों में सरकार की जांच और आगे की कार्रवाई से इस सवाल का जवाब काफी हद तक स्पष्ट होगा।
Author: Khabri Chai
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