उद्योग लगाने के लिए जमीन लेने वाले 800 उद्यमियों को नोटिस, 250 से भूखंड वापस लेने की तैयारी

 

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में रियायती और लीज दरों पर जमीन आवंटित कराने के बाद भी सालों तक उद्योग स्थापित न करने वाले करीब 800 उद्योगपतियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआइडीसी) ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। निगम ने इन सभी डिफाल्टर उद्योगपतियों को अंतिम कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। इस नोटिस में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आवंटित जमीन की लीज तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी। निगम ने इनमें से करीब 250 उद्योगपतियों से जमीन वापस लेने की आधिकारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

जमीन अपने नाम कराई लेकिर काम नहीं किया शुरू

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राजधानी रायपुर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों जैसे उरला, सिलतरा और प्रदेश के अन्य जिलों में कई बड़ी और मध्यम कंपनियों ने उद्योग लगाने के नाम पर बेशकीमती जमीनें तो अपने नाम करा ली हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं किया। इतना ही नहीं, इनमें से कई कंपनियां लंबे समय से नियमानुसार सरकारी टैक्स का भुगतान भी नहीं कर रही हैं। दूसरी ओर, प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए साल 2024 से लेकर अब तक कुल आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश और समझौता प्रस्तावों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, परंतु विडंबना यह है कि केवल 6,000 करोड़ रुपये की योजनाओं पर ही धरातल पर काम शुरू हो सका है। वर्तमान में लगभग 219 परियोजनाएं ही क्रियान्वयन के विभिन्न प्रारंभिक चरणों में पहुंच पाई हैं।

जानकारी के अनुसार, राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में कई उद्यमियों को उद्योग स्थापना के उद्देश्य से भूखंड आवंटित किए गए थे। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कई भूखंडों पर उद्योग शुरू नहीं हो सके हैं। इससे न केवल औद्योगिक विकास प्रभावित हो रहा है, बल्कि बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि भी अनुपयोगी बनी हुई है।

CSIDC द्वारा किए गए समीक्षा अभियान में सामने आया कि अनेक उद्योगपति जमीन लेने के बाद उत्पादन शुरू करने में विफल रहे हैं। कुछ मामलों में प्रारंभिक निर्माण कार्य भी नहीं किया गया, जबकि कई भूखंड पूरी तरह खाली पड़े हुए हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए निगम ने संबंधित उद्यमियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

जमीन लेकर उद्योग न लगाने वाले 800 उद्योगपतियों को CSIDC का नोटिस, 15 दिनों  में जवाब न देने पर लीज होगी निरस्त

अधिकारियों के मुताबिक, नोटिस के माध्यम से उद्यमियों से पूछा गया है कि निर्धारित समय में उद्योग स्थापित नहीं करने के पीछे क्या कारण हैं। साथ ही उन्हें परियोजना की वर्तमान स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी देने को कहा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या परियोजना शुरू करने की स्पष्ट योजना प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में आवंटन रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।

बताया जा रहा है कि करीब 250 ऐसे मामले चिन्हित किए गए हैं, जहां लंबे समय से कोई गतिविधि नहीं हुई है। इन भूखंडों को वापस लेकर नए निवेशकों को उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

राज्य सरकार और CSIDC का उद्देश्य औद्योगिक भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का कहना है कि कई निवेशक उद्योग लगाने के लिए जमीन की मांग कर रहे हैं, लेकिन पुराने आवंटन के कारण नई परियोजनाओं को भूमि उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में निष्क्रिय भूखंडों को पुनः अधिग्रहित कर नए उद्यमियों को अवसर देने की योजना बनाई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से औद्योगिक क्षेत्रों में वास्तविक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और केवल भूमि सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किए गए आवंटनों पर रोक लगेगी। इससे राज्य में उद्योगों की स्थापना, उत्पादन गतिविधियों और रोजगार सृजन को भी गति मिल सकती है।

CSIDC अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन उद्यमियों ने उद्योग स्थापना की दिशा में ठोस कार्य किए हैं या जिनकी परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, उनके मामलों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। हालांकि लंबे समय से निष्क्रिय पड़े भूखंडों के मामलों में निगम सख्त रुख अपनाने के मूड में है।

राज्य के औद्योगिक विकास की दृष्टि से यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में नोटिस का जवाब मिलने के बाद निगम अंतिम निर्णय लेगा और आवश्यकतानुसार भूखंड निरस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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Author: Khabri Chai

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