बिलासपुर। निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला उत्पीड़न और प्रताड़ना के गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य शासन और पुलिस विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने शिकायत पर अब तक की गई जांच और कार्रवाई की पूरी जानकारी पेश नहीं किए जाने पर शासन को सात दिन का अंतिम अवसर दिया है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर शपथ पत्र के साथ आवश्यक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने उपस्थित होना पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
महिला योग टीचर ने लगाए गंभीर आरोप
यह पूरा मामला बिलासपुर निवासी एक महिला योग टीचर की ओर से दायर की गई याचिका से जुड़ा है। महिला ने निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी पर ऑनलाइन योग क्लास के दौरान अश्लील बातचीत करने और वीडियो कॉल के दौरान आपत्तिजनक व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि उन्होंने जब कथित व्यवहार का विरोध किया तो उन्हें धमकियां दी गईं। महिला के मुताबिक, उनके पति पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर हैं और उन्हें झूठे आपराधिक मामले में फंसाने तथा घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थानांतरित कराने की धमकी भी दी गई।
इन आरोपों को लेकर महिला ने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
15 अक्टूबर 2025 को DGP से की थी शिकायत
याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने 15 अक्टूबर 2025 को कथित साक्ष्यों के साथ तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्च 2026 में रतनलाल डांगी को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच के लिए तत्कालीन IGP आनंद छाबड़ा और तत्कालीन DIG मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था।
हालांकि, महिला ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई और जांच अधिकारियों द्वारा आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास किया गया।
हाई कोर्ट ने मांगा अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा
मामले की सुनवाई 2 सितंबर 2026 को हुई। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से शिकायत और जांच के संबंध में अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
इस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए शासन को अंतिम सात दिन की मोहलत दी है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि शिकायत मिलने के बाद अब तक की गई कार्रवाई, जांच की स्थिति और संबंधित विभागीय कदमों का पूरा विवरण शपथ पत्र के माध्यम से अदालत में पेश किया जाए।
जवाब नहीं आया तो व्यक्तिगत पेशी के आदेश
हाई कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होना पड़ सकता है।
कोर्ट के इस निर्देश के बाद राज्य शासन और पुलिस विभाग पर मामले में जल्द कार्रवाई कर आवश्यक दस्तावेज और जवाब प्रस्तुत करने का दबाव बढ़ गया है।
जांच की निष्पक्षता पर भी उठे सवाल
इस मामले में केवल मूल शिकायत ही नहीं, बल्कि जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जांच अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की।
अब हाई कोर्ट के सामने शासन की ओर से दाखिल किए जाने वाले शपथ पत्र में यह स्पष्ट करना होगा कि शिकायत मिलने के बाद कौन-कौन से कदम उठाए गए, जांच किस स्तर तक पहुंची और अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
29 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी। इससे पहले शासन को हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक सात दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि शासन और पुलिस विभाग ने मामले में अब तक की कार्रवाई का पूरा विवरण प्रस्तुत किया है या नहीं।
फिलहाल हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद निलंबित IPS रतनलाल डांगी से जुड़े इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर है। अब सबसे अहम सवाल यही है कि सात दिन की समय सीमा के भीतर शासन की ओर से अदालत में क्या जवाब पेश किया जाता है और जांच को लेकर कोर्ट आगे क्या निर्देश देता है।
Author: Khabri Chai
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