नई दिल्ली: देश में मानसून का दूसरा चरण अब सबसे बड़े दबाव यानी ‘अलनीनो’ के साये में आ गया है, जिसे आगामी अगस्त और सितंबर के महीनों के लिहाज से बेहद निर्णायक माना जा रहा है। प्रशांत महासागर में अलनीनो के लगातार मजबूत होने से भारत के कई हिस्सों में सूखे की गंभीर आशंका बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों की नजरें अब हिंद महासागर में विकसित होने वाले ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ (आईओडी) पर टिकी हुई हैं।
चेरापूंजी में मानसून रूठा, 50% से ज्यादा की गिरावट
दुनियाभर में अत्यधिक बारिश के लिए मशहूर चेरापूंजी में इस वर्ष मानसून का मिजाज काफी कमजोर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स जिले को छोड़कर मेघालय के अन्य सभी जिलों में बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है। राज्य के 11 जिलों में से 5 जिलों में सामान्य से 50 से लेकर लगभग 80 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले मानसिराम में भी बारिश में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
उत्तर भारत में फिर तेज होगा मानसून, इन राज्यों में भारी बारिश के आसार
मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर भारत में रविवार से मानसूनी रेखा के उत्तर की ओर बढ़ने के साथ ही दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां एक बार फिर तेज हो सकती हैं। इसके अलावा:
पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्य: बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अच्छी बारिश का दौर लगातार जारी रहने की संभावना है।
बाढ़ और भारी बारिश का खतरा: गुजरात की तरफ बढ़ रहे डिप्रेशन (अवदाब) के कारण राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, उत्तरी महाराष्ट्र, दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिणी राजस्थान में भी भारी बारिश के पूरे आसार हैं।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक समीकरण?
‘मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम’ (एमसीएफएस) के आंकड़ों के अनुसार, आने वाले दिनों में अलनीनो और अधिक ताकतवर हो सकता है, जिससे मानसून कमजोर पड़ सकता है। अलनीनो के प्रभाव से मानसूनी हवाओं की ताकत घटती है और कई क्षेत्रों में बारिश का स्तर सामान्य से काफी नीचे चला जाता है।
हालांकि, वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि यदि सितंबर के दौरान हिंद महासागर में ‘आईओडी’ पॉजिटिव हो जाता है, तो हिंद महासागर से भारत की ओर अधिक नमी पहुंचेगी। इससे मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा मिलेगी और अलनीनो का नकारात्मक असर काफी हद तक कम हो सकता है। जानकारों का यह भी मानना है कि भारत का मानसून केवल अलनीनो पर निर्भर नहीं है, बल्कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र, मानसूनी ट्रफ की स्थिति और हिंद महासागर की अन्य मौसमी परिस्थितियां भी वर्षा की मात्रा एवं उसके वितरण को तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
Author: Khabri Chai
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